जिसको मेरी फ़िक्र नही, मैं उसका क्या करूँ?
मैं शायद थोडी सी पगली सी हूँ - अपनी दुनिया में खोई रहती हूँ। लेकिन जैसे John Henessy कहते हैं, "There's more in you." मुझमे और है। और अगर मैं देना चाहती हूँ, और कोई लेना नही चाहता मेरे लाख कोशिशों के बावजूद, थो फ़िर मैं क्या करूँ? उसको रहने देने के अलावा, मेरे पास और कोई रास्ता ही नही है।
मुझे शौक है कवितों का, गानों का, नाचने का। दिन में ख़्वाबों देखने का, इश्क भरी लव्जों का।
Friday, January 16, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
1 comment:
will translate soon! this is a simple short one... just a small ramble :) love you
Post a Comment